((اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ يَا أَللَّهُ بِأَنَّكَ الْوَاحِدُ الْأَحَدُ الصَّمَدُ الَّذِي لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يولَدْ، وَلَمْ يَكنْ لَهُ كُفُواً أَحَدٌ، أَنْ تَغْفِرَ لِي ذُنُوبِي إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِّيمُ)).
63. (ऐ अल्लाह! मैं तुझसे सवाल करता हूं इस बात के द्वारा कि तू अकेला है, एक और बेनियाज़ है, जिसने न किसी को जना और न वह किसी से जना गया है और न ही उसका कोई समकक्ष है, कि तू मेरे गुनाहों को माफ़ फरमा दे। बेशक तू ही बख़्शने वाला और मेहरबान है।) (1) ......................... (1) नसाईः3/52, हदीस संख्याः1300, इन्हीं शब्दों के साथ, अह़मदः4/338,ह़दीस संख्याः18974, इसे अल्बानी ने सह़ीह़ नसाईः1/280 में सह़ीह़ कहा है।
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham