((اللَّهُمَّ لَكَ رَكَعْتُ، وَبِكَ آمَنْتُ، وَلَكَ أَسْلَمْتُ، خَشَعَ لَكَ سَمْعِي، وَبَصَرِي، وَمُخِّي، وَعَــــظْمِي، وَعَصَبِي، [وَمَا استَقَلَّتْ بِهِ قَدَمِي])).
36. (ऐ अल्लाह! मैं तेरे ही लिए झुका (रुकूअ़ किया), तुझी पर ईमान लाया, तेरा ही फ़रमांबरदार बना और तेरे लिए झुक गए मेरे कान, मेरी आंखें, मेरा मग़्ज़ (भेजा), मेरी हड्डियां, मेरे पट्ठे, [और मेरा पूरा बदन जिसे मेरे दोनों पैर उठाए हुए हैं।]) (1) ................... (1) मुस्लिमः1/534, हदीस संख्याः771, अबू दाऊद, हदीस संख्याः760,761, तिर्मिज़ी ,हदीस संख्याः3421, नसाई, हदीस संख्याः1049,दोनों कोष्ठों के बाच का भाग इब्ने ख़ुज़ैमा, हदीस संख्याः607 औऱ इब्ने ह़िब्बान, हदीस संख्याः1901 का है।
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham