((اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيرَاً، اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيراً، اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيراً، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثيراً، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثيراً، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثيراً، وَسُبْحَانَ اللَّهِ بُكْرَةً وَأَصِيلاً)) ثَلاثاً ((أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ: مِنْ نَفْخِهِ، وَنَفْثِهِ، وَهَمْزِهِ)).
31. (अल्लाह सबसे बड़ा है, बहुत बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है, बहुत बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है, बहुत बड़ा है। हर प्रकार की अत्यधिक प्रशंसा केवल अल्लाह के लिए है। हर प्रकार की अत्यधिक प्रशंसा केवल अल्लाह के लिए है। हर प्रकार की अत्यधिक प्रशंसा केवल अल्लाह के लिए है। मैं सुबह़-शाम अल्लाह की पाकी बयान करता हूं।) तीन बार (मैं अल्लाह की पनाह पकड़ता हूं शैतान से, उसकी फूंक से, उसके थुकथुकाने से औऱ उसके चोके से।) (1) ....................... (1) अबू-दाऊदः1/203, हदीस संख्याः764, इब्ने माजाः1/265, हदीस संख्याः807, अह़मदः4/85, हदीस संख्याः16739, शैख़ शोऐब अरनाऊत अपनी मुस्नद की तह़क़ीक़ में कहते हैंः((ये ह़दीस ह़सन लेग़ैरेही है।)) और इब्ने तैमिया की किताब अल-कलिमुत्-तैयिब की तख़रीज, हदीस संख्याः62, में शैख़ अब्दुल क़ादिर अरनाऊत कहते हैंः((ये ह़दीस श्वाहिद के आधार पर सह़ीह़ है।)) इसे मुस्लिम ने इब्ने उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा से इससे मिलते-जुलते शब्दों में रिवायत किया है। इसमें एक क़िस्सा भी है। 1/420, हदीस संख्याः601
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham