جَاءَ أَعْرَابِيٌّ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ: عَلِّمْنِي كَلاماً أَقُولُهُ: قَالَ: ((قُلْ: لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيراً، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثِيراً، سُبْحَانَ اللَّهِ رَبِّ العَالَمِينَ، لاَ حَوْلَ وَلاَ قُوَّةَ إِلاَّ بِاللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ)) قَالَ: فَهَؤُلاَءِ لِرَبِّي، فَمَا لِي؟ قَالَ: ((قُلْ: اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي، وَارْحَمْنِي، وَاهْدِنِي، وَارْزُقْنِي)).
262. एक आराबी (देहाती) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और कहने लगाः मुझे कुछ वाक्य सिखायें जो मैं कहा करूं। आप न फ़रमायाः (कहोः अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है। उसका कोई शरीक नहीं। अल्लाह सबसे बडा है, बहुत बड़ा। तमाम तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है, बहुत ज़्यादा। अल्लाह बहुत पाक है जो सारे जहानों का रब है। अल्लाह ग़ालिब और हिकमत वाले की तौफ़ीक़ के बिना न गुनाह से बचने की हिम्मत है, न नेकी करने की ताक़त।) देहाती ने कहाः ये तो मेरे रब के लिए है, मेरे लिए क्या है? आप ने फ़रमायाः (कहोः ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे, मुझ पर रहम कर, मुझे हिदायत दे और मुझे रोज़ी दे।) (1) ........................... (1) मुस्लिमः4/2072, ह़दीस संख्याः2696, अबू दाऊदः1/220, ह़दीस संख्याः832, में यह वृध्दि है कि जब वो देहादी वापस जाने लगा तो आप न फ़रमायाः (इसने अपने दोनों हाथ भलाई से भर लिए।)
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham