كَانَ الرَّجُلُ إِذَا أَسْلَمَ عَلَّمَهُ النَّبيُّ صلى الله عليه وسلم الصَّلاَةَ ثُمَّ أَمَرَهُ أَنْ يَدْعُوَ بِهَؤُلاَءِ الْكَلِمَاتِ: ((اللَّهُمَّ اغْفِرِ لِي، وَارْحَمْنِي، وَاهْدِنِي، وَعَافِنِي وَارْزُقْنِي)).
263. (जब कोई वयक्ति मुसलमान होता तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उसे नमाज़ सिखाते, फिर उसे इन शब्दों के साथ दुआ करने का आदेश देतेः (ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे, मुझ पर रहम कर, मुझे हिदायत दे, मुझे आफ़ियद दे और मुझे रोज़ी दे।) (1) ........................... (1) मुस्लिमः4/2073, ह़दीस संख्याः3697, और मुस्लिम की एक रिवायत में है कि (ये शब्द तेरे लिए तेरी दुनिया औऱ आख़िरत जमा कर देंगे।)
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham