وَقَالَ صلى الله عليه وسلم: ((أَيَعْجِزُ أَحَدُكُم أَنْ يَكْسِبَ كُلَّ يَوْمٍ أَلْفَ حَسَنَةٍ)) فَسَأَلَهُ سَائِلٌ مِنْ جُلَسَائِهِ كَيْفَ يَكْسِبُ أَحَدُنَا أَلْفَ حَسَنَةٍ؟ قَالَ: ((يُسَبِّحُ مِائَةَ تَسْبِيحَةٍ، فَيُكتَبُ لَهُ أَلْفُ حَسَنَةٍ أَوْ يُحَطُّ عَنْهُ أَلْفُ خَطِيئَةٍ)).
258. रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः (क्या तुम में से कोई आदमी रोज़ाना एक हज़ार नेकी कमाने से भी आजिज़ है?) आपके पास बैठे हुए साथियों में से एक ने कहाः हम में से कोई एक हज़ार नेकी कैसे कमा सकता है? तो आपने फ़रमायाः (वह सो बार तस्बीह़ कहे तो उसके लिए एक हज़ार नेकी लिख दी जाएगी या (आपने फ़रमाया) उसके एक हज़ार गुनाह मिटा दिए जाएंगे।) (1) ........................... (1) मुस्लिमः4/2073, ह़दीस संख्याः2698
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham