((يُكَبِّرُ كُلَّمَا رَمَى بِحَصَاةٍ عِنْدَ الْجِمَارِ الثَّلاَثِ، ثُمَّ يَتَقَدَّمُ، ويَقِفُ يَدْعُو مُسْتَقْبِلَ الْقِبلَةِ، رَافِعاً يَدَيْهِ بَعْدَ الْجَمْرَةِ الْأُولَى وَالثَّانِيَةِ. أَمَّا جَمْرَةُ الْعَقَبَةِ فَيَرْمِيهَا وَيُكَبِّرُ عِنْدَ كُلِّ حَصَاةٍ وَيَنْصَرِفُ وَلاَ يَقِفُ عِنْدَهَا)).
239. (रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तीनों जमरात के पास जब भी कंकरी फेंकते, अल्लाहु अकबर कहते, फिर आगे बढ़ते और पहले तथा दूसरे जमरा के बाद क़िबले की ओर मुंह करके अपने दोनों हाथ उठाकर दुआ करते। किन्तु जमरा अ़क़बा (अन्तिम जमरा) की रमी करते हुये हर कंकरी के साथ अल्लाहु अकबर कहते और उसके पास ठहरे बिना वापस हो जाते।) (1) ........................... (1) ख़ारी फ़त्ह़ुल्-बारी के साथः3/583, हदीस संख्याः1751, और इसके शब्द यहीं देखिए, और बुख़ारी फ़त्ह़ुल्-बारी के साथः3/583,3/584,3/581, हदीस संख्याः1753, मुस्लिम, ह़दीस संख्याः1218
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham