((اللَّهُمَّ بِكَ أَصْبَحْنَا، وَبِكَ أَمْسَيْنَا ، وَبِكَ نَحْيَا، وَبِكَ نَمُوتُ وَإِلَيْكَ النُّشُورُ)). [وإذا أمسى قال: اللَّهم بك أمسينا، وبك أصبحنا، وبك نحيا، وبك نموت، وإليك المصير.]
78. (ऐ अल्लाह! तेरे ही नाम से हमने सुबह़ की और तेरे ही नाम से हमने शाम की (1), तेरे ही नाम से हम ज़िन्दा हैं और तेरा ही नाम लेते हुए हम मरेंगे और तेरी ही ओर लौट कर जाना है।) (2) ........................................... (1) और जब शाम के वक्त पढ़े तो ये कहेः ऐ अल्लाह, तेरे ही नाम से हमने शाम की और तेरे ही नाम से हमने सुबह़ की, तेरे ही नाम से हम ज़िन्दा हैं और तेरा ही नाम लेते हुए हम मरेंगे और तेरी ही ओर लौट कर जाना है। (2) तिर्मिज़ीः5/466, हदीस संख्याः3391, देखिएः सह़ीह़ तिर्मिजीः3/142
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham