((أَصْبَحْنَا وَأَصْبَحَ الْمُلْكُ لِلَّهِ ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، لاَ إِلَهَ إلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ، رَبِّ أَسْأَلُكَ خَيْرَ مَا فِي هَذَا الْيَوْمِ وَخَيرَ مَا بَعْدَهُ ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا فِي هَذَا الْيَوْمِ وَشَرِّ مَا بَعْدَهُ، رَبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكَسَلِ وَسُوءِ الْكِبَرِ، رَبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابٍ فِي النَّارِ وَعَذَابٍ فِي الْقَبْرِ)). [ وإذا أمسى قال: أمسينا وأمسى الملك للَّه] [وإذا أمسى قال: رب أسألك خير ما في هذه الليلة، وخير ما بعدها، وأعوذ بك من شر ما في هذه الليلة، وشر ما بعدها.]
77. (हमने सूबह़ की और अल्लाह के मुल्क ने सुबह़ की (1)। सब तारीफ़ अल्लाह के लिए है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है। उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है। उसी के लिए सब तारीफ़ है और वह हर चाज़ पर क़ुदरत रखने वाला है। ऐ मेरे रब! आज के इस दिन में जो ख़ैर एवं भलाई है और जो इस दिन के बाद ख़ैर एवं भलाई है, मैं तुझसे उसका सवाल करता हूं(2)। और इस दिन के शर (बुराई) और इसके बाद वाले दिन के शर से तेरी पनाह चाहता हूं। ऐ मेरे रब! मैं जहन्नम के अज़ाब और क़ब्र के अज़ाब से तेरी पनाह चाहता हूं।) (3) .................... (1) और जब शाम के वक्त पढ़े तो ये कहेः हमने शाम की और अल्लाह के मुल्क ने शाम की। (2) ऐ मेरे रब! आज की इस रात में जो ख़ैर एवं भलाई है और जो इस रात के बाद ख़ैर एवं भलाई है, मैं तुझसे उसका सवाल करता हूं और इस रात के शर (बुराई) और इसके बाद वाली रात के शर से तेरी पनाह चाहता हूं। (3) मुस्लिमः4/2088, ह़दीस संख्याः2723
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham