((اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ بِرَحْمَتِكَ الَّتِي وَسِعَتْ كُلَّ شَيْءٍ أَنْ تَغْفِرَ لِي)).
177. (ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरी उस रह़मत के द्वारा जिसने हर चीज़ को घेर रखा है ये सवाल करता हूं कि तू मुझे बख़्श दे।) (1) .............................. (1) इब्ने माजाः1/557, ये दुआ अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रज़ियल्लाहु अन्हुमा रोज़़ा खोलते समय पढ़ा करते थे। ह़ाफ़िज़ ने अल-अज़्कार की तख़रीज में इसे हसन कहा है। देखिए अल-अज़्कार की शरह़ः4/342
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham