((اللَّهُمَّ إِنَّا نَجْعَلُكَ فِي نُحُورِهِم، وَنَعُوذُ بِكَ مِنْ شُرُورِهِمْ)).
126. (ऐ अल्लाह! हम तुझी को उनके मुक़ाबले में करते हैं और उनकी शरारतों से तेरी पनाह चाहते हैं।) (1) ................................. (1) अबू दाऊदः2/89, ह़दीस संख्याः1537, ह़ाकिम ने इसे रिवायत करने के बाद सह़ीह़ कहा है और ज़ह्बी ने इसकी पुष्टि की है। 2/142
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham