((اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْبُخْلِ، وَأَعوذُ بِكَ مِنَ الْجُبْنِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ أَنْ أُرَدَّ إِلَى أَرْذَلِ الْعُمُرِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ الدُّنْيَا وَعَذَابِ الْقَبْرِ)).
60. (ऐ अल्लाह! मैं कन्जूसी से तेरी पनाह चाहता हूं, बुज़्दिली से तेरी पनाह चाहता हूं, औऱ इस बात से तेरी पनाह चाहता हूं कि निकम्मी उम्र की तरफ़ लौटाया जाऊं, तथा मैं दुनिया के फ़ित्ने औऱ क़ब्र के अ़ज़ाब से तेरी पनाह चाहता हूं।) (1) ...................... (1) बुखारी फ़त्ह़ुल-बारी के साथः6/35, हदीस संख्याः2822,6390
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham