((اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ بِأَنَّي أَشْهَدُ أَنَّكَ أَنْتَ اللَّهُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ الْأَحَدُ الصَّمَدُ الَّذِي لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُواً أَحَدٌ)) .
65. (ऐ अल्लाह! मैं तुझसे सवाल करता हूं इस बात के द्वारा कि मैं गवाही देता हूं कि तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, तू अकेला है, बेनियाज़ है, जिसने न किसी को जना और न वह किसी से जना गया है और न ही उसका कोई समकक्ष है, कि तू मेरे गुनाहों को माफ़ फरमा दे। बेशक तू ही बख़्शने वाला और मेहरबान है।) (1) ......................... (1) अबू दाऊदः2/62, ह़दीस संख्याः1493, तिर्मिज़ीः5/515 ,हदीस संख्याः3475, इब्ने माजाः2/1267, हदीस संख्याः3857, नसाईः1300, इन्हीं शब्दों के साथ, अह़मदः4/338,ह़दीस संख्याः18974, इसे अल्बानी ने सह़ीह़ नसाईः1/280 में सह़ीह़ कहा है।और देखिएः सह़ीह़ इब्ने माजाः2/319, सह़ीह़ तिर्मिज़ीः3/163
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham