يَقُولُ: ((وَأَنَا أَشْهَدُ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ وَأَنَّ مُحَمَّداً عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ، رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبَّاً، وَبِمُحَمَّدٍ رَسُولاً، وَبِالْإِسْلاَمِ دِينَاً)) ((يَقُولُ ذَلِكَ عَقِبَ تَشَهُّدِ الْمُؤَذِّنِ)).
23. (और मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं। वह अकेला है। उसका कोई शरीक नहीं और मुह़म्मद उसके बन्दे और उसके रसूल हैं। मैं अल्लाह को अपना रब मानकर, मुह़म्मद को अपना रसूल मानकर और इस्लाम को अपना दीन मानकर राज़ी हूं।) (1) (मुअज़्ज़िन के अश्हदु अल्ला इला-ह इल्लल्लाह और अश्हदु अन्-न मुह़म्मदर्-रसूलुल्लाह कहने के बाद ये दुआ पढ़े) (2) ...................... (1) मुस्लिमः1/290, हदीस संख्याः386, (2) इब्ने ख़ुज़ैमाः1/220
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham