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तौबा व इस्तिगफार करना (अल्लाह से बख्शिश और माफी माँगना) — ज़िक्र 6

الاستغفار و التوبة · हिस्नुल मुस्लिम · 6 / 6

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وَقَالَ صلى الله عليه وسلم: ((إِنَّهُ لَيُغَانُ عَلَى قَلْبِي وَإِنِّي لأَسْتَغْفِرُ اللَّهَ فِي الْيَوْمِ مِائَةَ مَرَّةٍ)).

253. आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः (मेरे दिल में पर्दा सा आ जाता है और मैं दिन में सौ मर्तबा अल्लाह के सामने तौबा करता हूं।) (1) ........................... (1) मुस्लिमः4/2075, ह़दीस संख्याः2702, इब्ने असीर फ़रमाते हैं कि पर्दा सा आ जाने से मुराद भूल है, क्योंकि आप ज़्यादा से ज़यादा ज़िक्र-अज़्कार, क़ुर्बत और अल्लाह के मुराक़बे में व्यस्त रहते थे। लेकिन जब इनमें से किसी चीज् में कोइ कमी रह जाती या आप भूल जाते तो उसे अपने लिए गुनाह शुमार करते और ऐसी ह़ालत में अधिक से अधिक तौबा व इस्तिग़फ़ार करते। देखिएः जामिउल-उसूलः4/386

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