قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم: ((وَاللَّهِ إِنِّي لأَسْتَغفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ فِي الْيَوْمِ أَكْثَرَ مِنْ سَبْعِينَ مَرَّةٍ)).
148. रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः (अल्लाह की क़सम, मैं दिन में सत्तर मर्तबा से ज़यादा अल्लाह से बख़्शिश मांगता हूं और उसके सामने तौबा करता हूं।) (1) ....................... (1) बुख़ारी फ़त्ह़ुल्-बारी के साथः11/101, हदीस संख्याः6307
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham