قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم: ((إِذَا كَانَ أَحَدُكُم مَادِحاً صَاحِبَهُ لاَ مَحَالَةَ فَلْيَقُلْ: أَحْسِبُ فُلاَناً وَاللَّهُ حَسِيبُهُ، وَلاَ أُزَكِّي عَلَى اللَّهِ أَحَداً، أَحْسِبُهُ – إِنْ كَانَ يَعْلَمُ ذَاكَ – كَذَا وَكَذَا)).
231. नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः(जब तुम में से किसी को किसी की तारीफ़ करनी ही पड़े तो वो ये कहेः मैं समझता हूं कि अमुक व्यक्ति ऐसा और ऐसा (उदाहरण स्वरूप नेक, परहेज़गार, दीनदार आदि) है, और अल्लाह उसका हिसाब लेने वाला है औऱ मैं किसी को अल्लाह के सामने पाक क़रार नहीं दे सकता। ये तारीफ़ भी उस समय करे जब यह ख़ूब अच्छी तरह़ जानता हो।) (1) ................................. (1) मुस्लिमः4/2296, ह़दीस संख्याः3000
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham