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खुश करनेवाली या ना पसन्दीदा चीज़ पेश आने पर क्या कहे ? — ज़िक्र 1

ما يقول من أتاه أمر يسره أو يكرهه · हिस्नुल मुस्लिम · 1 / 1

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كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا أَتَاهُ الْأَمْرُ يَسُرُّهُ قَالَ: ((الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي بِنِعْمَتِهِ تَتِمُّ الصَّالِحَاتُ)) وَإِذَا أَتَاهُ الْأَمْرُ يَكْرَهُهُ قَالَ: ((الْحَمْدُ لِلَّهِ عَلَى كُلِّ حَالٍ)).

218. रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास जब कोई ख़ुश करने वाली ख़बर आती तो आप फ़रमातेः (सब तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है, जिसकी कृपा से अच्छे काम पूरे होते हैं।) और जब कोई अप्रिय घटना घटित होती तो फ़रमातेः (हर ह़ाल में सब तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है।) (1) ............................... (1) इब्नुस्-सुन्नी की अ़मलुल्-यौमे वल-लैलाःहदीस संख्याः377, ह़ाकिम ने इसे रिवायत करने के बाद सह़ीह़ कहा है और ज़ह्बी ने इस पर सहमति व्यक्त की है, 1/499, और अल्बानी ने सह़ीह़ुल जामेः4/201 में सह़ीह़ कहा है।

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