((اللَّهُمَّ قِنِي عَذَابَكَ يَوْمَ تَبْعَثُ عِبَادَكَ)).
104. (ऐ अल्लाह! मुझे (उस दिन) अपने अ़ज़ाब से बचा (1), जिस दिन तू अपने बन्दों को उठायेगा) (2) ................................ (1) रसूलुल्लीह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब सोने का इरादा करते, अपना दायां हाथ अपने रुख़्सार के नीचे रखते, फिर ये दुआ पढ़तेः...) (2) अबू दाऊदः4/311, हदीस संख्याः1495, शब्द इसी के हैं, तिर्मिज़ी ,हदीस संख्याः3398, देखिएः सह़ीह़ तिर्मिज़ीः3/143 एवं सह़ीह़ अबू दाऊदः3/240
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham