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सोने के समय की दुआएँ । — ज़िक्र 13

أذكار النوم · हिस्नुल मुस्लिम · 13 / 13

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((اللَّهُمَّ أَسْلَمْتُ نَفْسِي إِلَيْكَ، وَفَوَّضْتُ أَمْرِي إِلَيْكَ، وَوَجَّهْتُ وَجْهِي إِلَيْكَ، وَأَلْجَأْتُ ظَهْرِي إِلَيْكَ، رَغْبَةً وَرَهْبَةً إِلَيْكَ، لاَ مَلْجَأَ وَلاَ مَنْجَا مِنْكَ إِلاَّ إِلَيْكَ، آمَنْتُ بِكِتَابِكَ الَّذِي أَنْزَلْتَ، وَبِنَبِيِّكَ الَّذِي أَرْسَلْتَ)).

111. (ऐ अल्लाह(1)! मैंने अपने नफ़्स (प्राण) को तेरे ह़वाले कर दिया, अपना मामला तुझे सौंप दिया, अपना चेहरा तेरी तरफ़ कर लिया और अपनी पीठ तेरी ओर झुका दी, तेरी तरफ़ रग़्बत करते हुए और तुझसे डरते हुए। तेरे दर के सिवा न कोई भाग कर जाने की जगह है और न पनाह की। मैं ईमान लाया तेरी उस किताब पर जो तूने ऊतारी और तेरे उस नबी पर जिसे तूने भेजा।) (2) ...................................... (1) (जब तुम बिस्तर पर जाना चाहो तो नमाज़ के वुज़ू की तरह़ वुज़ू करो, फिर अपने दाएं करवट के बल लेट जाओ और ये दुआ पढ़ोः.....) (2)इस दुआ को पढ़ने वाले के बारे में रसूह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः(अगर तुम्हारी मौत हो जाए तो तुम्हारी मौत फ़ितरते इस्लाम पर होगी।) बुखारी फ़त्ह़ुल-बारी के साथः11/113, हदीस संख्याः6313, मुस्लिमः4/2081, हदीस संख्याः2710

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