(سُبْحانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، أَشْهَدُ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ، أَسْتَغْفِرُكَ وَأَتوبُ إِلَيْكَ).
15. (ऐ अल्लाह! तू हर ऐब से पाक है और तेरे ही लिए सब तारीफ़ है। मैं गवाही देता हूं कि तेरे सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं। मैं तुझसे माफी चाहता हूं और तुझ से तौबा करता हूं।) (1) ................... (1) इमाम नसाई की किताब अमलुल-यौमे वल-लैला पृष्ठः173, देखिएः इर्वाउल-ग़लीलः1/135 और 3/94
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham