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नींद से जागने के बाद की दुआएं — ज़िक्र 4

أذكار الاستيقاظ من النوم · हिस्नुल मुस्लिम · 4 / 4

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﴿ إِنَّ فِي خَلْقِ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ وَاخْتِلاَفِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ لَآيَاتٍ لأُوْلِي الألْبَابِ * الَّذِينَ يَذْكُرُونَ اللَّهَ قِيَاماً وَقُعُوداً وَعَلَىَ جُنُوبِهِمْ وَيَتَفَكَّرُونَ فِي خَلْقِ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَذا بَاطِلاً سُبْحَانَكَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِ* رَبَّنَا إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ* رَّبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِياً يُنَادِي لِلإِيمَانِ أَنْ آمِنُواْ بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الأبْرَارِ* رَبَّنَا وَآتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَى رُسُلِكَ وَلاَ تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِنَّكَ لاَ تُخْلِفُ الْمِيعَادَ* فَاسْتَجَابَ لَهُمْ رَبُّهُمْ أَنِّي لاَ أُضِيعُ عَمَلَ عَامِلٍ مِّنكُم مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَى بَعْضُكُم مِّن بَعْضٍ فَالَّذِينَ هَاجَرُواْ وَأُخْرِجُواْ مِن دِيَارِهِمْ وَأُوذُواْ فِي سَبِيلِي وَقَاتَلُواْ وَقُتِلُواْ لأُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَلأُدْخِلَنَّهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الأَنْهَارُ ثَوَاباً مِّن عِندِ اللَّهِ وَاللَّهُ عِندَهُ حُسْنُ الثَّوَابِ * لاَ يَغُرَّنَّكَ تَقَلُّبُ الَّذِينَ كَفَرُواْ فِي الْبِلاَدِ * مَتَاعٌ قَلِيلٌ ثُمَّ مَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ وَبِئْسَ الْمِهَادُ * لَكِنِ الَّذِينَ اتَّقَوْاْ رَبَّهُمْ لَهُمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا نُزُلاً مِّنْ عِندِ اللَّهِ وَمَا عِندَ اللَّهِ خَيْرٌ لِّلأَبْرَارِ * وَإِنَّ مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ لَمَن يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَمَا أُنزِلَ إِلَيْكُمْ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيْهِمْ خَاشِعِينَ لِلَّهِ لاَ يَشْتَرُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ ثَمَناً قَلِيلاً أُوْلَئِكَ لَهُمْ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ*يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُواْ اصْبِرُواْ وَصَابِرُواْ وَرَابِطُواْ وَاتَّقُواْ اللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ ﴾

4. (बेशक आसमानों और ज़मीन की पैदाइश और रात-दिन के हेर-फेर में अ़क़्ल वालों के लिए निशानियां हैं, जो खड़े, बैठे और लेटे हर ह़ालत में अल्लाह को याद करते हैं और आसमानों और ज़मीन की पैदाइश के सम्बंद में सोच-विचार करते हैं और कहते हैंः ऐ हमारे रब! तूने इन्हें बेमक़्सद नहीं पैदा किया है। तू पाक है। हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा ले। ऐ हमारे रब! जिसे तूने जहन्नम में डाला, अवश्य ही तूने उसे रुसवा किया और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं। ऐ हमारे रब! हमने एक पुकारने वाले को सुना, जो ईमान के लिए पुकार रहा था कि अपने रब पर ईमान लाओ, तो हम ईमान ले आए। ऐ हमारे रब! हमारे गुनाहों को माफ कर दे, हमारी बुरीइयों को हमसे मिटा दे और मरने के बाद हमें नेक बंदों के साथ करदे। ऐ हमारे रब! तूने जिन-जिन चीज़ों के बारे में हमसे अपने पैग़म्बरों की ज़बानी वादे किए हैं, वो हमें अता कर और क़्यामत के दिन हमें रुसवा न करना। इसमें कुछ शक नहीं कि तू वादा ख़िलाफ़ी नहीं करता। अतः उनके रब ने उनकी दुआ क़बूल कर ली (ये कह कर) कि तुम में से किसी काम करने वाले के काम को, चाहे वो मर्द हो या औरत, मैं कभी नष्ट नहीं करता। तुम आपस में एक-दूसरे से हो, अतः वे लोग जिन्होंने हिजरत की और अपने घरों से निकाल दिए गए औऱ जिन्हें मेरी राह में कष्ट दी गई और जिन्होंने जिहाद किया और शहीद किए गए, मैं अवश्य उनकी बुराइयां उनसे दूर कर दूंगा और अवश्य उन्हें उन जन्नतों में ले जाऊंगा, जिनके नीचे नहरें बह रही हैं, ये है सवाब (पुण्य) अल्लाह की ओर से और अल्लाह ही के पास बेहतरीन बदला है। तुझे काफ़िरों का नगरों में चलना-फिरना धोखे में न डाल दे। ये तो बहुत ही थोड़ा लाभ है, उसके बाद उनका ठिकाना जहन्नम है और वह बुरा स्थान है। लेकिन जो लोग अपने रब से डरते रहे, उनके लिए जन्नतें हैं, जिनके नीचे नहरें बह रही हैं, उनमें वे हमेशा रहेंगे। ये मेहमानी है अल्लाह की ओर से, और नेक लोगों के लिए जो कुछ अल्लाह तअाला के पास है, वह बहुत ही बेहतर है। अवश्य अह्ले किताब में से कुछ ऐसे भी हैं, जो अल्लाह तआला पर ईमान लाते हैं औऱ तुम्हारी ओर जो उतारा गया है और उनकी ओर जो उतारा गया है, उस पर भी ईमान लाते हैं, अल्लाह तआला से डरते हैं और अल्लाह तआला की आयतों को थोड़ी-थोड़ी क़ीमत पर बेचते भी नहीं, उनका बदला उनके रब के पास है, निःसंदेह अल्लाह तआला जल्द हिसाब लेने वाले है। ऐ ईमान वालो! तुम डटे रहो और एक-दूसरे को थामे रखो और जिहाद के लिए तैयार रहो औऱ अल्लाह तआला से डरते रहो, ताकि तुम कामयाब हो।) (1) ............................ (1)आयतें आले इमरान (190-200) की हैं। बुखारी फ़त्ह़ुल-बारी के साथः8/337, हदीस संख्याः4569, मुस्लिमः1/530, हदीस संख्याः256

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