((اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي كُلَّهُ: دِقَّهُ وَجِلَّهُ، وَأَوَّلَهُ وَآخِرَهُ، وَعَلاَنِيَّتَهُ وَسِرَّهُ)).
46. (ऐ अल्लाह! मेरे छोटे-बड़े, अगले-पिछले तथा ज़ाहिर और पोशीदा तमाम गुनाहों को बख़्श दे।) (1) .................. (1) मुस्लिमः1/230, हदीस संख्याः483
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham