((اللَّهُمَّ لَكَ سَجَدْتُ وَبِكَ آمَنْتُ، وَلَكَ أَسْلَمْتُ، سَجَدَ وَجْهِيَ لِلَّذِي خَلَقَهُ، وَصَوَّرَهُ، وَشَقَّ سَمْعَهُ وَبَصَرَهُ، تَبَارَكَ اللَّهُ أَحْسنُ الْخَالِقينَ)).
44. (ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए ही सज्दा किया, तुझी पर ईमान लाया और तेरा ही फ़रमांबरदार बना। मेरे चेहरे ने उस ज़ात के लिए सज्दा किया जिसने उसे पैदा किया, उसकी सूरत बनाई, कानों में सूराख़ बनाए और आंखों के शिगाफ़ बनाए। बरकत वाला है अल्लाह, जो तमाम बनाने वालों से अच्छा है।) (1) ................... (1) मुस्लिमः1/534, हदीस संख्याः771, आदि।
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham