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सुबह और शाम के अज़कार और दुआएँ । — ज़िक्र 10

أذكار الصباح والمساء · हिस्नुल मुस्लिम · 10 / 24

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((اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالآخِرَةِ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ: فِي دِينِي وَدُنْيَايَ وَأَهْلِي، وَمَالِي، اللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِي، وَآمِنْ رَوْعَاتِي، اللَّهُمَّ احْفَظْنِي مِنْ بَينِ يَدَيَّ، وَمِنْ خَلْفِي، وَعَنْ يَمِينِي، وَعَنْ شِمَالِي، وَمِنْ فَوْقِي، وَأَعُوذُ بِعَظَمَتِكَ أَنْ أُغْتَالَ مِنْ تَحْتِي)).

84.(ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया औऱ आख़िरत में माफ़ी और आफ़ियत का सवाल करता हूं। ऐ अल्लाह! मैं अपने दीन, अपनी दुनिया, अपने ख़ानदान और अपने माल में तुझसे माफ़ी और आफ़ियत का सवाल करता हूं। ऐ अल्लाह! मेरी परदे वाली चीज़ पर परदा डाल दे और मेरी घबराहटों को सुकून में बदल दे। ऐ अल्लाह! मेरे सामने से, मेरे पीछे से, मेरे दाएं से, मेरे बाएं से और मेरे ऊपर से मेरी ह़िफ़ाज़त कर और इस बात से मैं तेरी अ़ज़मत की पनाह चाहता हूं कि अचानक अपने नीचे से हलाक किया जाऊं।) (1) .................................. (1) अबू दाऊद, हदीस संख्याः5074, इब्ने माजा, हदीस संख्याः3871, देखिएः सह़ीह़ इब्ने माजाः2/332

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