﴿آمَنَ الرَّسُولُ بِمَا أُنزِلَ إِلَيْهِ مِن رَّبِّهِ وَالْمُؤْمِنُونَ كُلٌّ آمَنَ بِاللَّهِ وَمَلآئِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ لاَ نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِّن رُّسُلِهِ وَقَالُواْ سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا غُفْرَانَكَ رَبَّنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ* لاَ يُكَلِّفُ اللَّهُ نَفْساً إِلاَّ وُسْعَهَا لَهَا مَا كَسَبَتْ وَعَلَيْهَا مَا اكْتَسَبَتْ رَبَّنَا لاَ تُؤَاخِذْنَا إِن نَّسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا رَبَّنَا وَلاَ تَحْمِلْ عَلَيْنَا إِصْراً كَمَا حَمَلْتَهُ عَلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِنَا رَبَّنَا وَلاَ تُحَمِّلْنَا مَا لاَ طَاقَةَ لَنَا بِهِ وَاعْفُ عَنَّا وَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَآ أَنتَ مَوْلاَنَا فَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ﴾.
101. (रसूल उस चीज़ पर ईमान लाए जो उसकी ओर अल्लाह की तरफ़ से उतारी गई और मुसलमान भी ईमान लाए। सब अल्लाह, उसके फ़रिशतों, उसकी किताबों और उसके रसूलों पर ईमान लाए। उसके रसूलों में से किसी के मध्य हम मतभेद नहीं करते। उन्होंने कहा कि हमने सुना और फ़रमांबरदारी की। ऐ हमारे रब! हम तुझसे क्षमा चाहते हैं और हमें तेरी ही ओर लौटना है। अल्लाह किसी प्राणी पर उसकी शक्ती से अधिक बोझ नहीं डालता। जो नेकी वह करेगा वह उसी के लिए है और जो बुराई वह करेगा वह उसी पर है। ऐ हमारे रब! अगर हम भूल गए हों या ग़लती की हो तो हमें न पकड़ना। ऐ हमारे रब! हम पर वह बोझ न डाल, जो हमसे पहले लोगों पर डाला था। ऐ हमारे रब! हम पर वह बोझ न डाल जिसकी हमें शक्ति नहीं हमें माफ़ कर दे, हमें बख़्श दे और हम पर दया कर, तू ही हमारा मालिक है, हमें काफ़िर समुदाय पर विजय प्रदान कर।) (1) ..................................... (1) जो आदमी यह दोनों आयतें रात में पढ़ ले, उसके लिए यह आयतें काफ़ी हो जायेंगी। बुखारी फ़त्ह़ुल-बारी के साथः9/94, हदीस संख्याः4008, मुस्लिमः1/554, हदीस संख्याः807, दोनों आयतें सूरा बक़रा की हैं। आयत संख्याः285,286
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham