((اللَّهُمَّ اسْقِنَا غَيْثاً مُغِيثاً مَرِيئاً مَرِيعاً، نَافِعاً غَيْرَ ضَارٍّ، عَاجِلاً غَيْرَ آجِلٍ)).
169. (ऐ अल्लाह! हमें ऐसी बारिश अता कर जो मददगार, ख़ुशगवार, हरियाली लाने वाली और फ़ायदा पहुंचाने वाली हो, नुक़सान देने वाली न हो, जल्दी आने वाली हो न कि देर से आने वाली।) (1) ................................. (1) अबू दाऊदः1/303, हदीस संख्याः1171, और शैख़ अल्बानी ने इसे सह़ीह़ कहा है, सह़ीह़ अबू दाऊदः1/216
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham