((اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى أَزْوَاجِهِ وَذُرِّيَّتِهِ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ. وَبَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى أَزْواجِهِ وَذُرِّيَّتِهِ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ. إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ)).
54. (ऐ अल्लाह! रह़मत नाज़िल कर मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर और आप की बीवियों तथा औलाद पर, जिस तरह़ तूने रह़मत नाज़िल की इब्राहीम अलैहिस्-सलाम की औलाद पर।और बरकत नाज़िल कर मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर और आप की बीवियों तथा औलाद पर, जिस तरह़ तूने बरकत नाज़िल की इब्राहीम अलैहिस्-सलाम की औलाद पर। बेशक तू तारीफ़ वाला एवं बुज़ुर्गी वाला है।) (1) ...................... (1) बुखारी फ़त्ह़ुल-बारी के साथः6/407, हदीस संख्याः3369, मुस्लिमः1/306,हदीस संख्याः407, शब्द मुस्लिम के हैं।
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham