((مِلْءَ السَّمَوَاتِ وَمِلْءَ الأَرْضِ، وَمَا بَيْنَهُمَا، وَمِلْءَ مَا شِئْتَ مِنْ شَيءٍ بَعْدُ. أَهلَ الثَّناءِ وَالْمَجْدِ، أَحَقُّ مَا قَالَ الْعَبْدُ، وَكُلُّنَا لَكَ عَبْدٌ. اللَّهُمَّ لاَ مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ، وَلاَ مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ، وَلاَ يَنْفَعُ ذَا الجَدِّ مِنْكَ الجَدُّ)).
40. (ऐ अल्लाह! तेरी ही तीरीफ़ है, इतनी कि भर जाए उससे आस्मान, ज़मीन औऱ जो कुछ उन दोनों के बीच में है और भर जाए हर वो चीज़ जिसे तू चाहे। तू तारीफ़ तथा बुज़ुर्गी वाला है। सबसे सच्ची बात जो बंदे ने कही ये है कि- और हम सब तेरे बंदे हैं- ऐ अल्लाह! जो तू दे उसे कोई रोकने वाला नहीं और जो तू रोक ले उसे कोई देने वाला नहीं, और किसी शान वाले को उसकी शान तेरे यहां कोई फ़ायदा नहीं पहुंचा सकती।) (1) .................... (1) मुस्लिमः1/346, हदीस संख्याः477
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham