وَقَالَ صلى الله عليه وسلم: ((مَا مِنْ أَحَدٍ يُسَلِّمُ عَلَيَّ إِلاَّ رَدَّ اللَّهُ عَلَيَّ رُوحِيَ حَتَّى أَرُدَّ عَلَيْهِ السَّلاَمَ)).
223. रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः (कोई आदमी जब भी मुझ पर सलाम पढ़ता है तो अल्लाह तआला मेरी रूह़ (प्राण) को मेरे बदन में वापस लौटा देता है, ताकि मैं उसे सलाम का जवाब दे सकूं।) (1) ................................ (1) अबू दाऊद ह़दीस संख्याः2041, और शैख़ अल्बानी ने इसे सह़ीह़ अबूदाऊदः1/383 में ह़सन कहा है।
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham